इस साल होने वाले टोक्यो ओलंपिक खेलों के दौरान भारतीय महिला एथलीटों पर रियो ओलंपिक की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव है.
2016 के रियो ओलंपिक में भारतीय महिला एथलीटों को दो पदक हासिल हुए थे- बैडमिंटन में पीवी सिंधु ने सिल्वर मेडल जीता था जबकि कुश्ती में साक्षी मलिक ने ब्रॉन्ज मेडल दिलाया था. इन खेलों में परंपरागत तौर पर भारतीय दल का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है, इसलिए लक्ष्य भी कमतर ही है.
2019 में वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाली सिंधु इस बार भी पदक की सबसे तगड़ी दावेदार हैं. बावजूद इसके, बीते कुछ सालों में महिला एथलीटों ने अपने प्रदर्शन से बेहतर संकेत दिए हैं.
निशानेबाज़ी, तीरंदाज़ी, कुश्ती, बैडमिंटन, जिमनास्टिक और ट्रैक एंड फील्ड जैसे खेलों में ओलंपिक की तैयारी के लिहाज से महिला एथलीट, पुरुषों की तुलना में कहीं ज्यादा सशक्त दावेदार लग रही हैं.
एक ऐसे देश में जहां परंपरागत तौर पर पुरुषों की प्रधानता रही है, जहां महिलाओं पर सामाजिक और सांस्कृतिक पाबंदियां लगी रही हों और खेल के लिए आधारभूत ढांचे का अभाव हो, वहां अगर महिलाएं पुरुषों के साथ या उनसे आगे खड़ी हैं तो इसकी बड़ी वजह महिला खिलाड़ियों के पिछले कुछ सालों में लगातार जोरदार प्रदर्शन रहा है.
आंकड़े कई बार पूरी कहानी नहीं कहते. उदाहरण के लिए, बीस साल पहले भारत ने सिडनी ओलंपिक के लिए 72 खिलाड़ियों का दल भेजा था, तब दल को एक ब्रॉन्ज मेडल हासिल हुआ था, भारोत्तोलन में कर्णम मलेश्वरी ने मेडल हासिल किया था.
रियो ओलंपिक में 15 खेल प्रतियोगिताओं में भारत की ओर से 117 सदस्यीय दल शामिल हुआ था. इनमें 54 महिला एथलीट शामिल थे जिन्होंने कुल मिलाकर दो मेडल हासिल किए. खेलकूद प्रतियोगिताओं में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की भागीदारी कई फैक्टर्स पर निर्भर करती है.
एथलीट के माता-पिता कितने प्रोग्रेसिव हैं, एथलीट का धर्म क्या है? वे शहर में रह रहे हैं या ग्रामीण इलाकों में, कौन से खेल उन्होंने चुना है और उनके परिवार की सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि कैसी है?
हरियाणा में प्रति हज़ार लड़कों पर लड़कियों की संख्या कम है, 2018 में राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़ प्रति हज़ार लड़के पर 924 लड़कियों का जन्म है. राज्य में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध दर भी ज़्यादा है लेकिन भारत भर में मशहूर कई महिला खिलाड़ी इस राज्य से निकली हैं.
इनमें फोगाट बहने भीं शामिल हैं, गीता, बबीता और विनेश ने कुश्ती में कई इंटरनेशनल पदक जीते हैं और इनकी ज़िंदगी पर बॉलीवुड में फिल्म भी बन चुकी है. दूसरी ओर, महाराष्ट्र एक लिबरल स्टेट है वहां के मुंबई में महिला निशानेबाज़ी को लेकर बदलाव का दौर 1990 से शुरू हुआ था, जिसका फल अब जाकर मिलना शुरू हुआ है.
हालांकि महाराष्ट्र में स्कूली स्तर पर कितनी महिला खेल कूद में हिस्सा लेती हैं, इसका पता लगाना मुश्किल है लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से तस्वीर का अंदाजा हो जाता है.
केंद्रीय युवा एवं खेल मामले के मंत्रालय की पहल पर 10 से 22 जनवरी के बीच की ओर से असम के गुवाहाटी में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स में महाराष्ट्र ने 591 एथलीटों का दल भेजा, जिनमें 312 लड़कियां थीं. महाराष्ट्र ने इस टूर्नामेंट में पदक तालिका में हरियाणा को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है.
हर साल 19 जनवरी को होने वाले टाटा मुंबई मैराथन में इस मेडल कैटगरी में 16 पुरुष हिस्सा ले रहे थे जबकि इस वर्ग में 11 महिला एथलीट शामिल हुईं. वहीं, पदक वाले हाफ मैराथन में नौ महिलाएं हिस्सा ले रही थीं जबकि पुरुष एथलीटों की संख्या सात थी.
वहीं, ओपन 10 किलोमीटर लंबी दौड़ में 2020 में 3909 महिलाओं ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था जबकि पिछले 753 महिलाएं शामिल हुई थीं.
एथलीट और उनके प्रशिक्षक बढ़ती भागीदारी के पीछे कई वजहों को गिनाते हैं, जागरूकता का बढ़ना, सामाजिक मान्यताओं में ढिलाई, टेलीविजन- इंटरनेट के जरिए मिलने वाला एक्सपोजर, प्राइज मनी और माता-पिता की तरफ से उत्साहित करना.
1990 से 2000 के दशक में निशानेबाजी की दुनिया में अपनी चमक बिखरने वाली सोमा शिरूर अब भारतीय जूनियर टीम की कोच हैं.
वह बताती हैं, "अब कहीं ज्यादा माता-पिता अपनी बेटियों को निशानेबाजी में भेजना चाहते हैं. अगर आप हाल में हुई राष्ट्रीय चैंपियनशिप को देखें तो पाएंगे कि हमारे दल में जितने पुरुष हैं, उतनी ही महिलाएं भी हैं."
अब महिलाएं कहीं ज्यादा खेल को देख भी रही हैं, एक दशक पुराने इंडियन प्रीमियर लीग क्रिकेट यानी आईपीएल की लोकप्रियता का भी इसमें योगदान रहा है.
केपीएमजी की ओर से सितंबर, 2016 की रिपोर्ट 'द बिजनेस ऑफ स्पोर्ट्स' के मुताबिक़, साल 2016 में आईपीएल देखने वाले दर्शकों में 41 प्रतिशत महिलाएं थीं जबकि 2015 के प्रो लीग कबड्डी में 50 प्रतिशत दर्शक महिलाएं थी. वहीं 2014 के इंडियन सुपर लीग फुटबॉल को देखने वालों में 57 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे हैं.
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